दुष्कर्म के मामलों में कानून में न्याय दिलाने को लेकर बेशक सख्त
प्रावधान हैं, लेकिन उन कानूनों पर अमल नहीं हो पाता। दुष्कर्म की शिकार
हुई पीड़ित युवतियां को न केवल लंबी कानून प्रक्रिया से रूबरू होकर परेशानी
का सामना करना पड़ता है, बल्कि समाज में बदनामी का दंश भी उन्हें जीवन भर
झेलना पड़ता है। बेशक पीड़िता मामला दर्ज कराने का साहस तो कर लेती
हैं, लेकिन उसके बाद की चुनौतियों का सामना नहीं कर पातीं। इससे उन्हें
अपना घर ही नहीं बल्कि शहर भी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ता है।
राजधानी की जिला अदालतों में ऐसे दर्जनों मामलों लंबित है, जिनमें पुलिस इस बात की जानकारी नहीं जुटा पाई है कि पीड़िताएं आखिर कहां चली गई। पिछले डेढ़ साल के दौरान इन जिला अदालतों में दुष्कर्म के लंबित 10,032 मामलों में 50 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें यह सब देखने को मिलता है। जब अदालत ने पीड़ित को बुलाया तो पता चला कि वे अपना घर छोड़कर दूसरे शहर में चली गई हैं।
कौन है जिम्मेदार....???
राजधानी की जिला अदालतों में ऐसे दर्जनों मामलों लंबित है, जिनमें पुलिस इस बात की जानकारी नहीं जुटा पाई है कि पीड़िताएं आखिर कहां चली गई। पिछले डेढ़ साल के दौरान इन जिला अदालतों में दुष्कर्म के लंबित 10,032 मामलों में 50 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें यह सब देखने को मिलता है। जब अदालत ने पीड़ित को बुलाया तो पता चला कि वे अपना घर छोड़कर दूसरे शहर में चली गई हैं।
कौन है जिम्मेदार....???

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें