शनिवार, 24 नवंबर 2012

भ्रष्ट परंपराओं का निर्वाहन करती कांग्रेस


देश के पहले सियासी परिवार से जुड़ने से पहले (के दामाद बनने से पहले) मुरादाबाद में जन्में 43 वर्षीय बिजनेसमैन राबर्ट वाड्रा को स्थानीय इलाकों में भी कोई नहीं जानता था। पर ऐतिहासिक गांधी परिवार का दामाद बनने के बाद वह आम से खास हो गये। देश की सड़कों पर आम आदमी के तौर पर घूमने वाले व्यक्ति के लिए दस जनपथ से नाता होने के बाद वो सबसे चर्चित चेहरे में से एक हो गए। 10 जनपथ के दामाद बनने के बाद सत्ता पर राबर्ट का अप्रत्यक्ष रूप से असर रहा है। 

देश के मुख्य न्यायाधीश, धर्म गुरु दलाई लामा समेत कुछ गिनी चुनी हस्तियों में से एक राबर्ट वाड्रा भी जिनकी बनाना रिपब्लिक देश के एयरपोर्ट पर तलाशी नही होती। मालूम ही इनका इतना ही नही बल्कि संसद भवन में एक बार सुरक्षाकर्मी रिवाल्वर ले जाते वक्त रोका गया लेकिन मामले के दस जनपथ के दामाद से जुड़े होने के कारण कोई कानूनी फंदा नही दिया गया। जहां टाटा को सौ साल, अंबानी 50 साल में धनवान होने में लगा वहीं प्रतिभा के धनी माफ़ करियेगा प्रियंका के धनी राबर्ट वाड्रा महज दस साल में कर रहे है। लेकिन मेरा उद्देश्य राबर्ट वाड्रा पर आरोप लगाने को सीधा मतलब इटैलियन झांसी की रानी सोनिया गांधी की साख पर बट्टा लगाना है। काग्रेंसी फौरन ही इसे विपक्ष की चाल करार देगें। लेकिन मैं विपक्ष का मोहरा नही हूँ, खुद को आम आदमी भी नही कह सकता नहीं तो काग्रेंसी अपनी पार्टी के खिलाफ मोर्चाबंदी कर चुके केजरीवाल के दल का बताने में भी संकोच नही करेंगे। पर मै तो कहने वाला हूँ और कहने वाले तो कहेंगे ही। 

राष्ट्रमंडल खेलो के दौरान जो घपला हुआ, उसमें शामिल डीलएफ को ठेके कांग्रेसी दामाद राबर्ट के कहने पर ही दिये गये थे। राबर्ट पर आरोपो का दौर शुरू होने के बाद आरोप यह भी है कि देश में हिल्टन की चाबी राबर्ट की ही बताई जा रही है। डीएलएफ में भी वाड्रा की हिस्सेदारी बताई जा रही है। क्रिकेट में भी शाहरुख़ खान की आईपीएल की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स में उनकी हिस्सेदारी बताई जा रही है। इतना ही नहीं 2-जी घोटाले में घिरी यूनीटेक टेलीकॉम कंपनी में भी दामाद साब के 20 फ़ीसदी की हिस्सेदारी की बात सामने आयी है। राबर्ट के पास कुछ प्राइवेट प्लेन और एयरलाइंस मे भी हिस्सेदारी की चर्चा हुई थी। आजकल दूसरों के नाम पर संपति को बनाने का खेल इस भारत जैसे विकास शील देश में चल रहा है। उस देश में राष्ट्रीय दामाद की दो चार बेनामी संपति होना कोई बड़ी बात नहीं है। कहने को तो बहुत कुछ है लेकिन ऐसा नहीं है सब कुछ सही हो लेकिन ऐसा नहीं है की सब कुछ गलत हो। इन सब आरोपों को दरकिनार कर सबसे बड़ी बात यह है कि आखिरकार धन आया कहां से है? एक आरटीआई के जवाब में सिर्फ अभी तक प्रश्नचिन्ह मिला है कि पिछले नौ वर्षों में राष्ट्रीय दामाद ने कितना टैक्स भरा है।  

इतिहास गवाह है कि भारत में परम्पराओं का निर्वाहन बखूबी किया जाता रहा है। उसी सिलसिले को राबर्ट वाड्रा ने आगे बढ़ाने का काम किया है। नेहरु खानदान की अनैतिकता, बेईमानी और भ्रष्टाचार की कहानी स्वतंत्र भारत में पहली बार उजागर नहीं हुई है। जवाहर लाल नेहरु के सत्ता संभालने के बाद उनके शासन काल में जीप घोटाला हुआ था। ईमानदारी की देवी कही जाने वाली इंदिरा गांधी के शासन काल में भ्रष्टाचार सर्वव्यापी हुआ। इंदिरा गांधी ने संवैधानिक संस्थाओं का कांग्रेसीकरण, अनैतिकरण किया था। परंपरा को आगे बढ़ाने का काम बोफोर्स घोटाले के समय तत्कालिक प्रधानमंत्री और नेहरु खानदान के वारिस राजीव गांधी ने तोप में दलाली खाकर किया। उनकी मौत के बाद भ्रष्टाचार की परंपरा को निभाने का बोझ उनकी पत्नी सोनिया गांधी के कंधों पर था। सोनिया ने भी परंपराओं और जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। उनपर मूर्ति तस्कर और कालेधन के आरोप चर्चित है। अब बारी राष्ट्रीय दामाद और प्रियंका के पति राबर्ट वाड्रा पर है जिन पर सास की सत्ता का लाभार्थी होने का आरोप लगा है।

सत्ता पर काबिज और राजनीति के शिखर पर बैठे लोग जनता की खून-पसीने की कमाई का दोहन करके अरबों की संपत्ति का काला धन जमा कर रहे हैं। लेकिन लोकतंत्र में बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि राबर्ट वाड्रा सियासी परिवार को दामाद होने के कारण गैर कानूनी तरीके को भी अपराधिक प्रवृत्ति को स्वीकार नहीं कर अपने आपको ईमानदार होने का ढ़ींढ़ोरा पीट रहे हैं। कांग्रेसी नेतृत्व वाली यूपीए-दो सरकार के सभी शीर्ष मंत्री राबर्ट वाड्रा के बचाव में उतरकर उनका बचाव करते हैं। बचाव में उतरे लोग सीधे तौर पर राबर्ट का बचाव कुतर्कों के आधार पर करते हैं और देश की इटैलियन बहु कि अप्रत्यक्ष रुप से चाटूकारिता करते नज़र आते हैं। सत्तापक्ष में काबिज किसी भी मंत्री-नेता पर भ्रष्टाचार का कोई भी आरोप लगता है फौरन कुतर्कों की ढ़ाल बनाकर उनका बचाव करने के लिए सरकार में शामिल कांग्रेसी कुनबे को सभी लोग तैयार रहते हैं। यूपीए-एक व दो की सरकार में हुए घोटालों को ऊपर बताये गये माध्यम (कुतर्क की ढ़ाल) से दबाने की राजनीतिक प्रक्रिया चल रही है। 2-जी हो या राष्ट्रमंडल खेल घोटाला, देवास घोटाला या फिर कोयला घोटाले के बाद तो हद ही हो गयी जब विकलांगों के लिए दिये जाने वाले भारत सरकार के पैसे को हड़पने का आरोप केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद पर लगे हैं। 

इतना कुछ होने के बाद भी कांग्रेसी इन सभी आरोपियों को ईमानदारी के प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं, तो वहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी खुद पर लगे आरोपों के जवाब में भी केवल जुमले का ही सहारा ले रहे हैं। न्यूयार्क टाइम्स में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर रिपोर्ट लिखते समय उस चुटकुले का भी जिक्र किया, जिसमें दांत के डाक्टर के पास जाकर भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मुंह नहीं खोलते हैं। आरोप लगने के बाद जिस तरह से कांग्रेसियों ने कुतर्कों का ढ़ाल बनाकर राबर्ट वाड्रा को बचाने का काम किया है वह इस बात का संकेत है कि सत्ता में बैठे लोग राजनीतिक साख को बचाने के लिए सत्ता की ताकत का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन सत्ता की ताकत के बावजूद राजनीतिक साख पर जनता कैसे बट्टा लगा सकती है यह हेमवती नंदन बहुगुणा के पौत्र साकेत बहुगुणा को मिली चुनावी हार से समझा जा सकता है। 

कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी में नैतिकता और ईमानदारी होती तो वह किसी भी परिस्थिति में अपने दामाद का बचाव नहीं करती। ऐसे में यह कैसे स्वीकार कर लिया जाये की सोनिया गांधी का परिवार ईमानदार है। गांधी परिवार राबर्ट वाड्रा परलगे आरोपों की स्वतंत्र जांच से क्यों परहेज कर रहा है। इस बात का जवाब देश की जनता अपने मतों को प्रयोग कर करेंगी और बीते 50 वर्षों को कांग्रेसी अत्याचारों को अंत होगा।