सोमवार, 25 अप्रैल 2011

तैयार रहो बजाने को ताली



जब भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठती है, तब में सोचता हूँ कि तोप से निकले भ्रष्टाचार के बम स्पेक्ट्रुम तक जा निकले है जो आम आदमी को सुनामी कि तरह तबाह भ्रष्टाचारियों को आबाद करते नज़र आ रहे है। महाशय सोचना बिमारी से घिर जाने जैसा है, अरे जनाब जब पूरा हिंदुस्तान इस बीमारी से ग्रसित है तो में भी बीमार ही सही
 
आज जब में लिखने बैठा हूँ तब अन्ना हजारे अपने अनशन को तृतीय दिवस तक उसी दृढ़ता व उसी विश्वास के साथ कायम रखे हुए है जैसे पहले दिन था। वे भ्रष्टाचारियों पर चाबुक  लगाने का प्रयत्न करने में तृतीय दिवस का अनशन हो जाने के बाद भी जोशीले प्रतीत हो रहे है। लेकिन भारतीय सरकार जो अब तक इनके भ्रष्टाचार को रोकने के प्रयास को बेजान बनाने में ही जुटी है। वो भारतीय लोकतंत्र जो दुनिया में अपने गुणगान कराने में ही मशगूल है। यह सबसे बड़ा लोकतंत्र अब लूटतंत्र का पर्याय बनता दिख रहा है
 
भारतीय लोकतंत्र इस समय भ्रष्टाचार से गर्मियों कि चिलचिलाती धुप में ठिठुरता नज़र आ रहा है। इस लूटतंत्र में वे लोग ही धन्य, सुखी एवं प्रगति कि और अग्रसर है जो भ्रष्टाचार में संलिप्त है। जब से मैंने अखबार को समझने कि कोशिश की है तब से बाज़ार में शेयर सूचकांक को तो ऊपर नीचे होते देखा है लेकिन भ्रष्टाचार को दो दूनी और रात चौगुनी तरक्की करते ही पाया है । इसके लिए इसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले सभी लोगों को बधाई
मैंने पिछले वित्तीय वर्ष में घपले और घपलेबाजों के आलावा किसी तीसरी घटना को घटित होते नहीं देखा। हालाँकि नए वित्तीय वर्ष के शुरुआत में ही भारत ने लंका दहन  कर 121 करोड़ व सभी क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया। मैंने कॉमनवेल्थ खेलों के सफल आयोजन के बाद सफल परन्तु अंतत: असफल उजागर होने के कारण असफल रहा घोटाला( कॉमनवेल्थ घोटाला)। 2g, 3g  स्पेक्ट्रम  घोटाला। आदर्श सोसायटी घोटाला आदि अनेक घोटाले। चलो छोड़ो हम घोटालों को गिनने और भ्रष्टाचार संवेदी सूचकांक जो अब तक के अपने रिकॉर्ड स्टार पर है, दिन प्रतिदिन नए आयामों के साथ नए रेकॉर्ड स्थापित कर रहा है, उसकी बुलंदियों को झकझोर कर नीचे उतारने व सभी देशवासियों के सामने उसकी परतें जो मटमैले होने के कारण स्पष्ट नहीं दिखाई दे रही है को खोलने के लिए प्रतिबद्धता एवं वचनबद्धता  के साथ मैदान में अन्ना हजारे के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए तैयार है
 
भ्रष्टाचार फैलाने वाले आँखों में पट्टी बांध, पूर्ण आशा व विश्वास के साथ किसी के सामने घूस देने का प्रस्ताव रख देते है सिर्फ एक शर्त के साथ भाई मेरा काम हो जाए...। भ्रष्टाचार एक जादूगर जो अपने आप को उच्चे ओहदे पर बैठे होने के कारण सिद्धपुरुष समझते है, आपके आपका काम हो जाने के बाद मस्तिष्क पटल पर ऐसे विराजमान हो जाते है जैसे स्वयं भगवान ने आपके कार्य पूरा करने का बीड़ा उठाया हो। घूस लेने वाला व्यक्ति आपके समक्ष भगवन बनकर आया हो और जब अप उसे छोड़ते नहीं है और वो आपका भगवान हो जाता है। भगवान पर अब घूस के भोग लगते चले जाते है और भ्रष्टाचार का सूचकांक छलांग मारता हुआ अपने नए रेकॉर्ड स्थापित करने को विवश होता प्रतीत होता है
 
मैं ऐसे तमाम जादूगर चाहे वह जादूगर की श्रेणी में प्रथम पर आते है या अंतिम पर। उनसे कहना चाहूँगा कि जनता आँखों पर पट्टी बांध कर खेल देखना चाहती थी तो तुम दिखा रहे थे लेकिन अब भ्रष्टाचार के विरोध में लोक और तंत्र आपस में अड़ गए है। अन्ना हजारे ने अन्न त्याग कर लोकमं कि आवाज़  को बुलंद करने के लिए तत्पर है। हज़ारों कि संख्या में लोगो को लेकर जो जादूगर अब तक जादू का खेल दिखा कर जनता की ताली बजाने की मानसिकता के साथ उनसे ताली पिटवाता रहा, अब चमत्कार देखने के लिए तैयार हो जाए। बाकि हम सब अपनी अपनी जिम्मेदारी लेते है अन्ना हजारे की तरह....। क्योंकि  अब काल चक्र बदल चुका है जादूगर साहब,  जनता व्याकुल है और कुछ करने पर आमदा। अब जल्द ही खेल दिखाएगी जनता और ताली ( बजायेंगे आप) पीटने वाले दर्शक आप--

बुधवार, 20 अप्रैल 2011

अनशन ख़त्म ' जारी जश्न '

एक और अनशन भ्रष्टाचार को मिटाने के संकल्प के साथ भ्रष्टाचार को नेस्तनाबूत करने कि जुगत में और अंजाम हित में, किसके भ्रष्टाचार के हित में या अनशन में बैठे अनत सभी लोगो के हित में जो भ्रष्टाचारियों पर लगाम कसने कसने कि बात करते है, उन सभी के पक्ष में ? फिलहाल सरकार थोड़ी सी झुकी नज़र आ रही है पिछली बार कि झुकी हुई सरकार से इस बार कि सरकार ने सबक लेते हुए झुक गयी मुझे पिछली बार का याद नहीं सरकार कब झुकी थी लेकिन घिरी बहुत दिन से है। जब सरकार घिरी हुई से जनतंत्र से, विपक्ष से, अपने खुद के बेहतरीन कारनामों, से तो झुक कर चोर की तरह भागने की कोशिश और कही छिप जाने का प्रयास तो होना स्वाभाविक है, शायद इसीलिए झुक गयी है।  लेकिन भाई प्रधानमंत्री उन सभी मंत्रियों के साथ जो भ्रष्टाचार के दल दल में डूबे हुए है, उनके साथ आप छिप कैसे सकते है, आखिर प्रधानमंत्री महोदय बदबू आयेगी ध्यान रखना

बहुत दिनों से जिस रास्ते को तय करके कोंलेज पहुँचता हूं, वहां उन रास्तों पर प्रजातंत्र बचाओ,जनतंत्र बचाओ, भ्रष्टाचार मिटाओ, सरकारी व्यवस्था में परिवर्तन लाओ  के बड़े-बड़े पोस्टर,होर्डिंग और कभी-कभी जुलूस देखता हूं
। फिर एकाएक उन सब से ध्यान हटकर आपकी मनमोहक मुस्कान की बरबस याद आ जाती है, जिसके चलते आप ने अब तक अपने सफ़ेद कुरते पर एक भी दाग नहीं आने दिया। पता नहीं क्यों लोग आपकी ना निकलने वाली मुस्कान पर ही फ़िदा है? शायद लोग समझते है कि आप कम बोलते है, शर्मीली स्वाभाव के दाग रहित प्रधानमंत्री है लेकिन मै उन लोगो से अलग राय रखता हूं आपके लिए, जब आप बोलेंगे तब सार्वजनिक कर दूंगा फिलहाल नहीं

अरे महोदय ये बताये कि आपके पास शुभकामनाओं से भरे हुए लिफाफों कि तादाद तो बहुत हो गयी होगी और ढेर सारे फोन पर भी सन्देश आये होंगे, आने भी चाहिए, क्योंकि आपने भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल विधेयक की मांग को मान लिया
। वैसे मान लेना समझदारी से परिपूर्ण निर्णय था, क्योंकि क्या  पता जंतर-मंतर कहीं तहरीर चौक न बन जाता क्योंकि जनता इससे इस कदर परेशान है, इसकी एक झलक तो जंतर-मंतर पर मिल ही गयी होगी जनाब? इस बात का अंदाज़ा तो आपने भी लगा लिया होगा की वहां उपस्थित लोग आपकी जनसभाओं के के समय मौजूद रहने के लिए बाध्य नहीं बल्कि भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए आतुर है महोदय  वे वहां खाना पूर्ति के लिए नहीं पहुंचे थे बल्कि वे आतंरिक सच्चाई के साथ आन्दोलन में शामिल थे जनाब। ज्यों-ज्यों अनशन का समय बढ़ता चला जा रहा था, त्यों-त्यों लोगों की संख्या में इजाफा होता जा रहा था और सरकार के प्रति गुस्सा भी बढ़ रहा था। लेकिन सरकार भी कम समझदार नहीं है वः भी झुकती चली जा रही थी और अन्ना को मन ही मन सलाम और कोसती रही होगी। अरे भाई आपको और हमें सुने थोड़े ही पड़ेगा क्योंकि शोर व भारी नारेबाजी चल रही थी सरकार के विरोध में और अन्ना के समर्थन में

प्रधानमंत्री महोदय, लोकतंत्र में लोक को अलग करके आप तंत्र चला नहीं सकते
में सोचता हूँ कि शायद अब आप सोच तो जरुर रहे होंगे की अन्ना हजारे के साथ जो प्रबुद्ध वर्ग खड़ा है उससे नहीं लेकिन जो भारत का एक-एक नागरिक खड़ा होने के लिए तैयार है जो खड़ा है उससे से आप जरुर सहमें हुए होंगे। वे फ़िल्मी हस्तियाँ जिनको अपने मेकअप और काम में व्यस्तता के चलते समय का आभाव रहता है अपने प्रशंषकों से रूबरू नहीं हो पाते वे अन्ना के साथ भरष्टाचार विरोधी मुहिम के यज्ञ के आहूति देने के लिए बैठे है न कि किसी बैक ग्राउंड म्यूजिक पर होंठ हिलाते, पैर थिरकाते नज़र आ रहे है लग रहा है जनतंत्र बच निकलेगा
अरे आपको सुख समृधि नहीं मिल सकती शायद वो केवल इस समय भ्रष्टाचार कि पगडण्डी से ही आती है
। भ्रष्टाचार लचीला है, शर्माते हुए दबे पाँव पर्दा करके आता है साथ ही गंध को फैलाता है। इस देश में भ्रष्टाचार एक बिजनेस हो गया है और महाशय क्योंकि अब मंथन करके भ्रष्टाचारी दानवों का भ्रष्टाचारी विरोधी देवों का सहयोग अब नहीं चाहिए। उस वक्त जब समुन्द्र मंथन हुआ था तब टेकनीक नहीं आती थी और उन्होंने अपनी टेकनीक इजात कर ली है। लेकिन ध्यान रहे इस 'टेकनीक' से बड़ी कोई 'टेक्नॉलजी' आएगी। बस भारतीय जन को उस टेक्नॉलजी कि तलाश है जो भारतीय को वर्षों के बाद खुशहाल करने में सहायक सिद्ध होगा जब टेक्नॉलजी लॉंच होकर बाज़ार में आयेगी। तब मानेगा जश्न और चलेंगे मुबारकबाद देने के ना थमने वाले सिलसिले ओए सन्नाटे में लोकतंत्र में लोकपाल बिल पास होने के कारण मुश्किल से आये हुए उस दिन के जोरदार स्वागत कि तयारी  में मानने वाला जश्न....। लेकिन ध्यान रखना सरकार को घुटनों के बाल चलना देखना बड़ा अनोखा मगर जीत को हाथ में लेना बड़ा सुखद और जश्न को मानना आनंददायक ..........
मुबारकबाद फिर से कमज़ोर कानों में सुनने वाले लोगों को भी जिन्होंने ये सुना कि मानसून सत्र में लोकपाल विधेयक पास हो जाएगा