जब भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठती है, तब में सोचता हूँ कि तोप से निकले भ्रष्टाचार के बम स्पेक्ट्रुम तक जा निकले है। जो आम आदमी को सुनामी कि तरह तबाह भ्रष्टाचारियों को आबाद करते नज़र आ रहे है। महाशय सोचना बिमारी से घिर जाने जैसा है, अरे जनाब जब पूरा हिंदुस्तान इस बीमारी से ग्रसित है तो में भी बीमार ही सही।
आज जब में लिखने बैठा हूँ तब अन्ना हजारे अपने अनशन को तृतीय दिवस तक उसी दृढ़ता व उसी विश्वास के साथ कायम रखे हुए है जैसे पहले दिन था। वे भ्रष्टाचारियों पर चाबुक लगाने का प्रयत्न करने में तृतीय दिवस का अनशन हो जाने के बाद भी जोशीले प्रतीत हो रहे है। लेकिन भारतीय सरकार जो अब तक इनके भ्रष्टाचार को रोकने के प्रयास को बेजान बनाने में ही जुटी है। वो भारतीय लोकतंत्र जो दुनिया में अपने गुणगान कराने में ही मशगूल है। यह सबसे बड़ा लोकतंत्र अब लूटतंत्र का पर्याय बनता दिख रहा है।
भारतीय लोकतंत्र इस समय भ्रष्टाचार से गर्मियों कि चिलचिलाती धुप में ठिठुरता नज़र आ रहा है। इस लूटतंत्र में वे लोग ही धन्य, सुखी एवं प्रगति कि और अग्रसर है जो भ्रष्टाचार में संलिप्त है। जब से मैंने अखबार को समझने कि कोशिश की है तब से बाज़ार में शेयर सूचकांक को तो ऊपर नीचे होते देखा है लेकिन भ्रष्टाचार को दो दूनी और रात चौगुनी तरक्की करते ही पाया है । इसके लिए इसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले सभी लोगों को बधाई।
मैंने पिछले वित्तीय वर्ष में घपले और घपलेबाजों के आलावा किसी तीसरी घटना को घटित होते नहीं देखा। हालाँकि नए वित्तीय वर्ष के शुरुआत में ही भारत ने लंका दहन कर 121 करोड़ व सभी क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया। मैंने कॉमनवेल्थ खेलों के सफल आयोजन के बाद सफल परन्तु अंतत: असफल उजागर होने के कारण असफल रहा घोटाला( कॉमनवेल्थ घोटाला)। 2g, 3g स्पेक्ट्रम घोटाला। आदर्श सोसायटी घोटाला आदि अनेक घोटाले। चलो छोड़ो हम घोटालों को गिनने और भ्रष्टाचार संवेदी सूचकांक जो अब तक के अपने रिकॉर्ड स्टार पर है, दिन प्रतिदिन नए आयामों के साथ नए रेकॉर्ड स्थापित कर रहा है, उसकी बुलंदियों को झकझोर कर नीचे उतारने व सभी देशवासियों के सामने उसकी परतें जो मटमैले होने के कारण स्पष्ट नहीं दिखाई दे रही है को खोलने के लिए प्रतिबद्धता एवं वचनबद्धता के साथ मैदान में अन्ना हजारे के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए तैयार है।
भ्रष्टाचार फैलाने वाले आँखों में पट्टी बांध, पूर्ण आशा व विश्वास के साथ किसी के सामने घूस देने का प्रस्ताव रख देते है सिर्फ एक शर्त के साथ भाई मेरा काम हो जाए...। भ्रष्टाचार एक जादूगर जो अपने आप को उच्चे ओहदे पर बैठे होने के कारण सिद्धपुरुष समझते है, आपके आपका काम हो जाने के बाद मस्तिष्क पटल पर ऐसे विराजमान हो जाते है जैसे स्वयं भगवान ने आपके कार्य पूरा करने का बीड़ा उठाया हो। घूस लेने वाला व्यक्ति आपके समक्ष भगवन बनकर आया हो और जब अप उसे छोड़ते नहीं है और वो आपका भगवान हो जाता है। भगवान पर अब घूस के भोग लगते चले जाते है और भ्रष्टाचार का सूचकांक छलांग मारता हुआ अपने नए रेकॉर्ड स्थापित करने को विवश होता प्रतीत होता है।
मैं ऐसे तमाम जादूगर चाहे वह जादूगर की श्रेणी में प्रथम पर आते है या अंतिम पर। उनसे कहना चाहूँगा कि जनता आँखों पर पट्टी बांध कर खेल देखना चाहती थी तो तुम दिखा रहे थे। लेकिन अब भ्रष्टाचार के विरोध में लोक और तंत्र आपस में अड़ गए है। अन्ना हजारे ने अन्न त्याग कर लोकमं कि आवाज़ को बुलंद करने के लिए तत्पर है। हज़ारों कि संख्या में लोगो को लेकर जो जादूगर अब तक जादू का खेल दिखा कर जनता की ताली बजाने की मानसिकता के साथ उनसे ताली पिटवाता रहा, अब चमत्कार देखने के लिए तैयार हो जाए। बाकि हम सब अपनी अपनी जिम्मेदारी लेते है अन्ना हजारे की तरह....। क्योंकि अब काल चक्र बदल चुका है जादूगर साहब, जनता व्याकुल है और कुछ करने पर आमदा। अब जल्द ही खेल दिखाएगी जनता और ताली ( बजायेंगे आप) पीटने वाले दर्शक आप।--

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