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सचि$$$..न..., सचि$$$..न..., सचि$$$..न..., सचि$$$..न...

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"शतकों" का "शतक", भारतीय क्रिकेट टीम का "रण-बांकुरा" , क्रिकेट का "भगवान्", क्रिकेट में लम्बी दूरी तय करने में की ललक, नई उचाइयां नापने के लिए सदैव तत्पर, क्रिकेट के मैदान में मील के पत्थरों स्थापित करने में माहिर, " विवादों" में न रहने,वाला, जिसका खेल "कला" की शैली में और शालीनता " सज्जनता" की कोटी में...,प्रतीक , विशेषण , उपमा...आदि अनेक ऐसे शब्द जिस शख्स पर सबसे ज्यादा सटीक बैठते हैं उसका नाम है सचिन रमेश तेंदुलकर...। महान शायर बशीर ने अपनी एक कविता में लिखा है कि " इतना ना चाहों उन्हें कि देवता हो जाए"। लेकिन देखते-देखते लोगों ने सचिन को इतना चाहा की वह देवता तुल्य हो गए। सचिन के जो स्ट्रोक हैं वे भारतीय क्रिकेटरों की दो पीढ़ियों के बीच सदैव पुल का काम करेंगे। तुलनाएं सिर्फ किताबी होती है और निरर्थक भी। लेकिन आज भयावह स्थिति सामने दिख रही है जब क्रिकेट के भगवान् ने अंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। लेकिन सचिन के सपने से एक दिन तो बाहर आना ही था। एक दिन इस बात को महसूस करना...

न्याय मिलने की चुनौतियों में किसी ने घर छोड़ा तो किसी ने शहर...

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दुष्कर्म के मामलों में कानून में न्याय दिलाने को लेकर बेशक सख्त प्रावधान हैं, लेकिन उन कानूनों पर अमल नहीं हो पाता। दुष्कर्म की शिकार हुई पीड़ित युवतियां को न केवल लंबी कानून प्रक्रिया से रूबरू होकर परेशानी का सामना करना पड़ता है, बल्कि समाज में बदनामी का दंश भी उन्हें जीवन भर झेलना पड़ता है। बेशक पीड़िता मामला दर्ज कराने का साहस तो कर ल ेती हैं, लेकिन उसके बाद की चुनौतियों का सामना नहीं कर पातीं। इससे उन्हें अपना घर ही नहीं बल्कि शहर भी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ता है। राजधानी की जिला अदालतों में ऐसे दर्जनों मामलों लंबित है, जिनमें पुलिस इस बात की जानकारी नहीं जुटा पाई है कि पीड़िताएं आखिर कहां चली गई। पिछले डेढ़ साल के दौरान इन जिला अदालतों में दुष्कर्म के लंबित 10,032 मामलों में 50 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें यह सब देखने को मिलता है। जब अदालत ने पीड़ित को बुलाया तो पता चला कि वे अपना घर छोड़कर दूसरे शहर में चली गई हैं। कौन है जिम्मेदार....???