"शतकों" का "शतक", भारतीय क्रिकेट टीम का "रण-बांकुरा", क्रिकेट
का "भगवान्", क्रिकेट में
लम्बी दूरी तय करने में की ललक, नई उचाइयां नापने के लिए सदैव तत्पर, क्रिकेट के मैदान में मील के पत्थरों स्थापित करने में माहिर, "विवादों"
में न रहने,वाला, जिसका खेल "कला" की शैली में और शालीनता
"सज्जनता" की कोटी में...,प्रतीक, विशेषण,
उपमा...आदि अनेक ऐसे शब्द जिस शख्स पर सबसे ज्यादा सटीक बैठते हैं उसका नाम
है सचिन रमेश तेंदुलकर...।
महान शायर बशीर ने अपनी एक कविता में लिखा है कि " इतना ना
चाहों उन्हें कि देवता हो जाए"। लेकिन देखते-देखते लोगों ने सचिन को इतना
चाहा की वह देवता तुल्य हो गए। सचिन के जो स्ट्रोक हैं वे भारतीय
क्रिकेटरों की दो पीढ़ियों के बीच सदैव पुल का काम करेंगे। तुलनाएं सिर्फ किताबी होती
है और निरर्थक भी।
(भविष्य के लिए सचिन को ढे़रों शुभकामनाएं)

