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वोज़िन्हा के नाम एक खुला खत...

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प्रिय वोज़िन्हा, फीफा वर्ल्ड कप 2026 का इतिहास जब लिखा जाएगा, तो शायद उसके पहले पन्ने पर विश्व चैंपियन का नाम होगा। लेकिन कुछ पन्ने ऐसे भी होंगे, जहां ट्रॉफी नहीं, बल्कि जज़्बे की कहानी लिखी जाएगी... और उन पन्नों पर तुम्हारा नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज होगा। फुटबॉल की दुनिया तुम्हें सिर्फ़ एक गोलकीपर के रूप में याद नहीं रखेगी। वह तुम्हें उस योद्धा के रूप में याद रखेगी जिसने अपनी दोनों हथेलियों से दुनिया की सबसे ताकतवर टीमों के सपनों को बार-बार रोक दिया। फीफा रैंकिंग में 67वें स्थान पर मौजूद एक छोटे से देश की जर्सी पहनकर तुम मैदान में उतरे, लेकिन खेल ऐसा दिखाया कि स्पेन, उरुग्वे और अर्जेंटीना जैसी दिग्गज टीमें भी तुम्हारे सामने संघर्ष करती नज़र आईं। अर्जेंटीना के खिलाफ तुम्हारे वे अविश्वसनीय बचाव... हर डाइव, हर छलांग और हर सेव बता रही थी कि गोलपोस्ट के सामने एक गोलकीपर के साथ पूरे केप वर्डे का आत्मविश्वास खड़ा है। अर्जेंटीना के खिलाफ मैच की जब आख़िरी सीटी बजी... तब कैमरा तुम्हारी आंखों पर ठहर गया, जिनमें आंसू थे। लेकिन यकीन मानो, दुनिया ने उन्हें हार के आंसू नहीं समझा। वे उस सफर के आंसू...

केप वर्डे की टीम के नाम एक खुला ख़त...

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प्रिय केप वर्डे, फीफा वर्ल्ड कप जीतने वाली टीमों के नाम इतिहास की किताबों में लिखे जाते हैं। लेकिन कुछ टीमें ऐसी होती हैं, जो किताबों से पहले लोगों के दिलों में अपनी जगह बना लेती हैं। तुम उन्हीं टीमों में से एक हो। फीफा रैंकिंग में 67वें स्थान पर मौजूद, पांच लाख की आबादी वाले एक छोटे से देश ने जब विश्व कप में कदम रखा, तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि तुम फुटबॉल की सबसे बड़ी ताकतों को इस तरह चुनौती दोगे। तुमने स्पेन को रोका, उरुग्वे को रोका, सऊदी अरब के खिलाफ मजबूती से खड़े रहे और अर्जेंटीना जैसी विश्व चैंपियन टीम को भी 90 मिनट तक जीतने नहीं दिया। यह नतीजे पूरी दुनिया के लिए एक संदेश था कि फुटबॉल में नाम के साथ हौसला खेलता है। तुम्हारे हर खिलाड़ी ने मैदान पर अपना सब कुछ झोंक दिया। हर टैकल, हर पास, हर सेव और हर दौड़ में एक पूरे देश का सपना दिखाई देता था। फिर अर्जेंटीना के खिलाफ मैच में आख़िरी सीटी बजी... स्कोरबोर्ड ने अर्जेंटीना को विजेता तय कर दिया, लेकिन फुटबॉल प्रेमियों ने अपने दिलों में एक और विजेता चुन लिया... वो तुम हो केप वर्डे। तुम ट्रॉफी नहीं उठा सके, लेकिन तुमने दुनिया भर के करो...

क्रिस्टियानो रोनाल्डो के नाम खुला खत...

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Dear Cristiano Ronaldo, हर कहानी का एक आख़िरी अध्याय होता है, लेकिन कुछ किरदार ऐसे होते हैं जिनकी गूंज आख़िरी पन्ने के बाद भी सुनाई देती है। आप उन्हीं में से एक हैं। फीफा वर्ल्ड कप की ट्रॉफी शायद आपकी झोली में नहीं आई। इतिहास जब आपके नाम के आगे उपलब्धियां गिनाएगा, तो यह बात भी दर्ज होगी। लेकिन इतिहास यह भी लिखेगा कि एक लड़का, जिसने पुर्तगाल के छोटे से द्वीप मदीरा से सफर शुरू किया, उसने पूरी दुनिया को यह यकीन दिलाया कि मेहनत, अनुशासन और जुनून से असंभव भी संभव हो सकता है। हमने आपको गिरते देखा, फिर उठते देखा। आलोचनाओं के बीच मुस्कुराते देखा। हार के बाद और मजबूत होकर लौटते देखा। हर गोल के साथ आपने स्कोरबोर्ड बदलने के साथ करोड़ों सपनों को नई उड़ान दी। 232 अंतरराष्ट्रीय मैच, 146 गोल, छह विश्व कप, अनगिनत रिकॉर्ड... ये सब आपकी महानता का हिस्सा हैं, लेकिन आपकी सबसे बड़ी पहचान वह प्रेरणा है जो आपने दुनिया भर के युवाओं को दी। आपने सिखाया कि प्रतिभा आपको शुरुआत दिलाती है, लेकिन महानता तक पहुंचाने का काम निरंतर मेहनत करती है। विश्व कप आपके करियर का अधूरा सपना रह गया, लेकिन इससे आपकी विरासत अधूरी नह...

वैलेनटाइन डे : सेक्स वर्करों के लिए जिस्म का खेल ही प्यार

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प्यार और इजहार का दिन ‘ वैलेनटाइट डे ’ समाज में हर ओर मोहब्बत का ही संचार करता है। बस फर्क इसे मनाने और इससे अपना जीवनचर्या को निभाने का होता है। आज भले ही समाज में ज्यादातर लोग अपने प्रेमी-प्रेमिकाओं के साथ गलबहियां करते मॉल व सिनेमा हॉल में घूम रहे हो। पर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो आज भी और दिन की तरह अपनी पेट की जरुरतों के लिए काम करने को ही वैलेनटाइन के तर्ज पर मना रहे हैं। इन्हीं में दिल्ली की एक अंतहीन सड़क जीबी रोड पर बसी वैश्याओं का भी हाल जिस्म बेचकर घर चलाने के अलावा कुछ और नहीं है। बल्कि अगर समाज के लोग अपने आप में खुश रहते हो तो उस दिन इनके घर का चूल्हा जलना भी दूभर होता है। वैलेनटाइन डे की धूम के बीच जीबी रोड की सेक्स वर्कर चांदनी (काल्पनिक नाम) आज भी अपने काम को ही वैलेनटाइन के तौर पर गुजार रही है। आम लोगों की तरह उसकी सुबह भी सूरज की किरणों के साथ , नहा-धोकर संज कर घर से निकलने के रुप में ही होता है लेकिन वह किसी साथी से मिलने या पार्टी करने नहीं जाने वाली। उस सीधे जीबी रोड पर अपने ग्राहक की शारीरिक भूख को मिटाने के लिए पहुँचना है , क्योंकि भले ही आज का दिन प्रेम का ह...

सचि$$$..न..., सचि$$$..न..., सचि$$$..न..., सचि$$$..न...

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"शतकों" का "शतक", भारतीय क्रिकेट टीम का "रण-बांकुरा" , क्रिकेट का "भगवान्", क्रिकेट में लम्बी दूरी तय करने में की ललक, नई उचाइयां नापने के लिए सदैव तत्पर, क्रिकेट के मैदान में मील के पत्थरों स्थापित करने में माहिर, " विवादों" में न रहने,वाला, जिसका खेल "कला" की शैली में और शालीनता " सज्जनता" की कोटी में...,प्रतीक , विशेषण , उपमा...आदि अनेक ऐसे शब्द जिस शख्स पर सबसे ज्यादा सटीक बैठते हैं उसका नाम है सचिन रमेश तेंदुलकर...। महान शायर बशीर ने अपनी एक कविता में लिखा है कि " इतना ना चाहों उन्हें कि देवता हो जाए"। लेकिन देखते-देखते लोगों ने सचिन को इतना चाहा की वह देवता तुल्य हो गए। सचिन के जो स्ट्रोक हैं वे भारतीय क्रिकेटरों की दो पीढ़ियों के बीच सदैव पुल का काम करेंगे। तुलनाएं सिर्फ किताबी होती है और निरर्थक भी। लेकिन आज भयावह स्थिति सामने दिख रही है जब क्रिकेट के भगवान् ने अंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। लेकिन सचिन के सपने से एक दिन तो बाहर आना ही था। एक दिन इस बात को महसूस करना...

न्याय मिलने की चुनौतियों में किसी ने घर छोड़ा तो किसी ने शहर...

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दुष्कर्म के मामलों में कानून में न्याय दिलाने को लेकर बेशक सख्त प्रावधान हैं, लेकिन उन कानूनों पर अमल नहीं हो पाता। दुष्कर्म की शिकार हुई पीड़ित युवतियां को न केवल लंबी कानून प्रक्रिया से रूबरू होकर परेशानी का सामना करना पड़ता है, बल्कि समाज में बदनामी का दंश भी उन्हें जीवन भर झेलना पड़ता है। बेशक पीड़िता मामला दर्ज कराने का साहस तो कर ल ेती हैं, लेकिन उसके बाद की चुनौतियों का सामना नहीं कर पातीं। इससे उन्हें अपना घर ही नहीं बल्कि शहर भी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ता है। राजधानी की जिला अदालतों में ऐसे दर्जनों मामलों लंबित है, जिनमें पुलिस इस बात की जानकारी नहीं जुटा पाई है कि पीड़िताएं आखिर कहां चली गई। पिछले डेढ़ साल के दौरान इन जिला अदालतों में दुष्कर्म के लंबित 10,032 मामलों में 50 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें यह सब देखने को मिलता है। जब अदालत ने पीड़ित को बुलाया तो पता चला कि वे अपना घर छोड़कर दूसरे शहर में चली गई हैं। कौन है जिम्मेदार....???

रण-बांकुरा सचिन

सचिन के बारे में कुछ कहने में जो शब्द इस्तेमाल किये जाते है वो शब्द अब खुद को सम्मानित महसूस करते है। अब सिर्फ यह तय करना है कि सचिन क्रिकेट को ज्यादा चाहतें हैं या क्रिकेट प्रेमी सचिन को। "शतको" का "शतक" जिसकी पहचान बन गयी है। सचिन रमेश तेंदुलकर क्रिकेट जगत का भगवान , अब तक क्रिकेट के महासंग्राम में पांच बार भारतीय क्रिकेट टीम का रण-बांकुरा , महासंग्राम को सपने में जीतने के सपने को पिछले साल खुली आँखों से देखकर पूरा कर चुका क्रिकेट का भगवान्। सचिन का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट का सफ़र 23 वर्षों से भी अधिक का रहा है। इन तेईस वर्षों में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा सचिन ने। क्रिकेट में उन्होंने लम्बी दूरियाँ तय की , नई उचाइयां नापीं और कई कीर्तिमान मील के पत्थर के तरह स्थापित किये। इन सब में सबसे महत्वपूर्ण एवं बड़ी बात जो उनकी महानता को एक नई मजबूती प्रदान करती है कि वो कभी भी " विवादों" में नहीं रहे। उनका खेल "कला" कि शैली में आता है और शालीनता " सज्जनता" की कोटी में। सचिन ने ऐसे रिकार्ड स्थापित किये है जिन्हें तोड़ पाना मुश्कि...