प्यार और इजहार का दिन ‘वैलेनटाइट डे’ समाज में हर ओर मोहब्बत का ही संचार करता है। बस फर्क इसे मनाने और इससे
अपना जीवनचर्या को निभाने का होता है। आज भले ही समाज में ज्यादातर लोग अपने
प्रेमी-प्रेमिकाओं के साथ गलबहियां करते मॉल व सिनेमा हॉल में घूम रहे हो। पर कुछ
लोग ऐसे भी हैं जो आज भी और दिन की तरह अपनी पेट की जरुरतों के लिए काम करने को ही
वैलेनटाइन के तर्ज पर मना रहे हैं। इन्हीं में दिल्ली की एक अंतहीन सड़क जीबी रोड
पर बसी वैश्याओं का भी हाल जिस्म बेचकर घर चलाने के अलावा कुछ और नहीं है। बल्कि
अगर समाज के लोग अपने आप में खुश रहते हो तो उस दिन इनके घर का चूल्हा जलना भी
दूभर होता है।
वैलेनटाइन डे की धूम के बीच जीबी रोड की सेक्स वर्कर
चांदनी (काल्पनिक नाम) आज भी अपने काम को ही वैलेनटाइन के तौर पर गुजार रही है। आम
लोगों की तरह उसकी सुबह भी सूरज की किरणों के साथ, नहा-धोकर संज कर घर से
निकलने के रुप में ही होता है लेकिन वह किसी साथी से मिलने या पार्टी करने नहीं
जाने वाली। उस सीधे जीबी रोड पर अपने ग्राहक की शारीरिक भूख को मिटाने के लिए
पहुँचना है, क्योंकि भले ही आज का दिन प्रेम का हो पर
तन्हा-अकेले रहने वाले लोगों को प्यार तो इस चांदनी जैसी लड़कियों से ही मिलता है।
हां इससे यह सहूलियत जरुर होती है कि अकेला इंसान पैसे से प्यार पाता है और चांदनी
जिस्मानी प्यार देकर कुछ पैसे।
31 साल की रुबी (काल्पनिक नाम) अपने दो बच्चों के साथ
अकेले ही रहती है और दोनों बच्चों को पालने की जिम्मेदारियों के लिए उसे यही
रास्ता दिखा। कम पढ़ी लिखी होने तथा पति द्वारा एक भाई को बेचे जाने के बाद उसके
नसीब में इससे बेहतर काम नहीं था। जिसे काफी ना-नुकुर के बाद उसे स्वीकारना ही
पड़ा। ऐसा ही कुछ हाल रुबी का भी है, जिसे छह साल की उम्र में ही
किसी ने कोठे पर छोड़ दिया था। तब से कोठा ही उसकी रिहाईस और रोजगार देने वाला
स्थान बन गया। अब वह हर ग्राहक को अपने प्रेमी के तौर पर देखती तथा उसमें ही अपना
प्यार तलाशती है। इस तरह उसे ना तो प्यार के लिए भटकना पड़ता है और ना ही पैसों के
लिए तरसना पड़ता है। रुबी कहती है कि वैसे मेरे पिता इकलौते ऐसे आदमी थे जिन्होंने
बिना किसी शर्त के मुझसे प्यार किया।
प्रेम चतुर्दशी पर लोगों में उत्साह और अपने साथी के साथ
डेट पर जाने का उतावलापन सामान्य ही बात है। पर यह स्वाभाविक सी बातें भी जीबी रोड
की चांदनी और रुबी के साथ नहीं होती। इन दोनों के लिए प्रेम का असली मतलब पति के
छोड़ के जाने के बाद घर पर बच्चों को दो जून की रोटी दिलाने का इंतजाम करना ही है।
चाहे इसके बदले में उसे अपना जिस्म ही क्यों ना बेचना पड़ा है। लोगों की निगाह में
भले ही जिस्मफरोशी का धंधा गलत हो लेकिन हकीकत लोगों की सोच और नजरिये से काफी अलग
है। इस धंधे में कोई भी अपनी मर्जी से नहीं आना चाहता पर मजबूरियां इंसान को सब
कुछ करने को राजी कर ही लेती है।
ऐसे में सवाल उठता है कि आम लोगों जैसी दिखने वाली चांदनी
और रुबी आम लोगों की ही तरह अपना वैलेनटाइन डे क्यों नहीं मना रही। क्या उसे समाज
में हर किसी की तरह खुश होने का अधिकार नहीं है या फिर उसके लिए खुश होने का तरीका
और पैमाना भी अलग है। उम्मीद तो यही है कि चांदनी और रुबी इस वैलेंटाइन डे पर कोठे
के मालिक को गुलाब देकर,
किसी ग्राहक द्वारा उपहार लेकर तथा जीबी रोड की अन्य सेक्स वर्करों
के साथ थोड़े राहत और खुशी के पल बिता कर मनाये। ताकि उन्हें भी समाज के मुख्य
धारा से कटे होने का गम़ ना हो और एक आस रहे कि इन खुशियों पर उनका भी अधिकार है।
(सेक्स वर्करों से बातचीत पर आधारित....)




